मम अंतर्नाद

मम अंतर्नाद
मेरा एकल ग़ज़ल संग्रह

शुक्रवार, 30 अगस्त 2019

गीत:- पथ तकते रहेंगे




तुम भले सो जाओ मेरे नैन जगते ही रहेंगे,
बाट देखेंगे तुम्हारी, नित्य पथ तकते रहेंगे।

आओगे जिस रोज़ सम्मुख भावनाएं रो पड़ेंगी
शीर्ष पर होगी खुशी, अधरों पे मुस्कानें बढ़ेंगी
फिर खुशी के आंसुओं से, पग तेरे ढकते रहेंगे

तुम भले सो जाओ मेरे नैन जगते ही रहेंगे,
बाट देखेंगे तुम्हारी, नित्य पथ तकते रहेंगे।

तुम अभी समझे नहीं हो किस तरह का प्यार है ये
तेरे सारे कष्ट अपने कर लूं, ये अधिकार है ये
तेरे सारे अश्रु मेरे चक्षु से बहते रहेंगे

तुम भले सो जाओ मेरे नैन जगते ही रहेंगे,
बाट देखेंगे तुम्हारी, नित्य पथ तकते रहेंगे।

चंद्रमा से तुम चमकते , मैं अमावस रात जैसी
हैं सितारे संग तेरे, मैं हूँ टूटे पात जैसी
जब विरह की बात होगी , हम सदा सजते रहेंगे

तुम भले सो जाओ मेरे नैन जगते ही रहेंगे,
बाट देखेंगे तुम्हारी, नित्य पथ तकते रहेंगे।



स्वधा रवींद्र "उत्कर्षिता"

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