मम अंतर्नाद

मम अंतर्नाद
मेरा एकल ग़ज़ल संग्रह

गुरुवार, 6 जुलाई 2023

जब समझ आ जाए अच्छा......

 🙋🙋🙋🙋🙋🙋🙋🙋


देर से आए या जल्दी 

जब समझ आ जाए अच्छा......


भाव की गंगा में गोते हो लगाते, तो लगाओ

किंतु यह भी देख लेना , खुद को ही मत भूल जाओ

जो तुम्हारे बन तुम्हें जीवन कि राहों पर मिलेंगे

वो ही तुमको छोड़ देंगे वो ही इक दिन फिर छलेंगे

सत्य यह तुम हो अकेले जब समझ आ जाए अच्छा


देर से आए या जल्दी 

जब समझ आ जाए अच्छा......


तुम हंसोंगे जब तलक यह सृष्टि सारी साथ होगी

यंत्रणाओं के भंवर में बस विविक्ता साथ होगी

साथ है संसार लेकिन, कब तलक यह साथ होगा

कब तलक इन प्रिय जनों का हाथ तेरे हाथ होगा

एक दिन सब छूट जाना जब समझ आ जाए अच्छा 


देर से आए या जल्दी 

जब समझ आ जाए अच्छा......


तुम वृहद होना विचारों से , नहीं संक्षिप्त होना

एक साधक की तरह सब देखना मत लिप्त होना

जो तुम्हारा है तुम्हारे आप में ही आप्त है वह

जन्म से है साथ तेरे , मोक्ष तक भी प्राप्त है वह 

नाव की पतवार है वह जब समझ आ जाए अच्छा


देर से आए या जल्दी 

जब समझ आ जाए अच्छा......


🙋🙋🙋🙋🙋🙋🙋🙋



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

आपकी अनमोल प्रतिक्रियाएं