साहित्य संजीवनी

Hindi poetry and Hindi sahitya Hindi Literature

मम अंतर्नाद

मम अंतर्नाद
मेरा एकल ग़ज़ल संग्रह

शुक्रवार, 30 अगस्त 2019

गीत :- अंशकालिक भूल






अंशकालिक हुई भूल हमसे प्रिये ,
पूर्णकालिक गरल किंतु पीना पड़ा,
कर्म फल यूँ मिला इस धरा पर हमें, 
मर के भी ज़िन्दगी को था जीना पड़ा।

वो प्रथम पल की जब थे मिले दो नयन,
भाव सागर की तरह उमड़ने लगे,
हम कहीं बह न जाएं नई राह पर,
सोच कर ये स्वयं से ही लड़ने लगे,
सांस चलने लगी तीव्र गति से मेरी,
शीत में ग्रीष्म का फिर महीना लगा,

अंशकालिक हुई भूल हमसे प्रिये ,
पूर्णकालिक गरल किंतु पीना पड़ा।

थी विरह को लिए घूमती रात दिन,
जैसे मरुथल की हिरनी वो प्यासी जिये,
देख कर जल की बूंदों का प्रतिबिंब वो,
उसकी राहों में बढ़ती अधर को सिये,
भाग कर पास पहुंचे , पिया सिंधु तक,
किंतु पी ना मिले , घाव सीना पड़ा।

अंशकालिक हुई भूल हमसे प्रिये ,
पूर्णकालिक गरल किंतु पीना पड़ा।
स्वधा रवींद्र "उत्कर्षिता "






कवियत्री स्वधा रवींद्र "उत्कर्षिता" at 6:29 pm
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स्वधा रवींद्र "उत्कर्षिता"
वो ताजमहल हूँ जो पत्थर का नहीं है जिसमें है बहता रक्त लाल श्वेत नहीं है चाहो तो कहीं से भी हमे तोड़ के देखो दिल ही मिलेगा साथ में पाषाण नहीं है |

2 टिप्‍पणियां:

  1. Unknown4 सितंबर 2019 को 5:36 am बजे

    बहुत सुंदर रचना

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
      जवाब दें
  2. स्वधा रवींद्र "उत्कर्षिता"5 सितंबर 2019 को 9:29 pm बजे

    आभार मित्र।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
      जवाब दें
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मैं तेरी हदों में समा नहीं सकता, मैं आसमान हूँ खुद को झुका नहीं सकता, तुझको मिलना है अगर मुझसे तो ऊपर उठ जा, मैं किसी हाल में खुद को गिरा नहीं सकता।

मेरा विस्तृत परिचय



नाम :- स्वधा रवींद्र "उत्कर्षिता"
माता:- श्रीमती उमा पाण्डेय
पिता:- श्री सुधीर कुमार पाण्डेय
पति:- श्री रवींद्र कुमार अमात्य
पता:- 5/937, विराम खंड
गोमती नगर, लखनऊ, 226010

मोबाइल:-
7860099770,
74083 55699

मेल आई डी:- studyhall.swadha@gmail.com

व्यावसायिक परिचय: वास्तुविद(आर्किटेक्ट), शिक्षक

कार्यरत:- स्टडी हॉल स्कूल।

शिक्षा :
एम.एड,
बी.एड,
एम.ए राजनीति शास्त्र ,
एम. ए समाज शास्त्र,
एम. ए इतिहास,
एम.ए शिक्षा शास्त्र
डिप्लोमा वास्तुविद
संगीत विशारद प्रयाग संगीत समिति
संगीत निपुण भातखंडे संगीत महा विद्यालय।

विधाएं:-
गीत, गज़ल, दोहे, मुक्तक, छंद, लयबद्ध
कविताएं, छंदमुक्त कविताएं, लघु कथाएं,
कहानियां,संस्मरण।

प्रकाशित कृतियाँ :-
कल्पवृक्ष एकल काव्य संग्रह
कथांजली साझा लघुकथा संग्रह
काव्यांजलि साझा काव्य संग्रह
कारवाँ साझा लघु कथा संग्रह

फेसबुक पेज-

https://www.facebook.com/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A6-157359845069276/?ti=as

मेरे ब्लॉग:-
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Utkarshita-ke-haiku.blogspot.com

सम्मान:-
आदिशक्ति ब्रिगेड की उत्तरप्रदेश की अध्यक्ष,
महादेवी वर्मा सम्मान ।
कवितालोक द्वारा गीतिका गौरव सम्मान
सारथी मिशन ट्रस्ट द्वारा सी वी रमन शांति
पुरुस्कार।
गुफ़्तगू पब्लिकेशन द्वारा सुभद्रा कुमारी चौहान
सम्मान।

साहित्यिक परिचय:

वो ताजमहल हूँ मैं जो
पत्थर का नही है
जिसमे है बहता रक्त लाल
श्वेत नही है
चाहो तो कहीं से भी हमे
तोड़ के देखो
दिल ही मिलेगा साथ मे
पाषाण नहीं है।

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