ख़्वाब नए कुछ बो लेने दो,
फ़ोन तो रखो, सो लेने दो।।
ख़्वाब नए कुछ बो लेने दो,
फ़ोन तो रखो, सो लेने दो।।
वो ताजमहल हूँ जो पत्थर का नहीं है
जिसमें है बहता रक्त लाल श्वेत नहीं है
चाहो तो कहीं से भी हमे तोड़ के देखो
दिल ही मिलेगा साथ में पाषाण नहीं है |
तुम हो अपने राज महल में
मैं हूँ नदिया के उस पार
प्रियतम मेरी हार नहीं ये
ये तो है बस तेरी हार।।
कलयुग में भी मिला तुम्हें एक सत्य बोलने वाला साथी
त्रेता वाली भावनाओं में लिपटी सीता जैसी साथी
द्वापर वाला प्रेम परोसे राधा भी किस्मत में आई
लेकिन देखो भाग्य तुम्हारा, तुमको रास नहीं वो आई
अब ढूंढो तुम सगरे जग में जाओ सच्चा वाला प्यार
प्रियतम मेरी हार नहीं ये
ये तो है बस तेरी हार।।
बहुत पुकारा था मैंने पर तुम तक मन की बात न पहुँची
रातें रो रो काटीं थी जो, तुम तक वो हर रात न पहुँची
तुम सोये जब शैय्या पर तब, मैं बस करवट बदल रही थी
तुम हँसते जब मित्रों के संग, मैं जोगन बन टहल रही थी
हिचकी अब आ अटकायेगी ग्रीवा में खाया आहार
प्रियतम मेरी हार नहीं ये
ये तो है बस तेरी हार।।
जाओ विदा तुम्हें करते हैं, जहाँ रहो सुख से रहना
पर तुम अपनी बातों के हो पक्के , ये अब ना कहना
किसी अन्य के संग भावनाओं के रिश्ते यदि रखना
है अनुरोध निभाना , उसको बीच राह पर मत तजना
वरना प्यार सदा के लिए कहा जायेगा बस व्यभिचार
प्रियतम मेरी हार नहीं ये
ये तो है बस तेरी हार।।
वो ताजमहल हूँ जो पत्थर का नहीं है
जिसमें है बहता रक्त लाल श्वेत नहीं है
चाहो तो कहीं से भी हमे तोड़ के देखो
दिल ही मिलेगा साथ में पाषाण नहीं है |
समंदर हूँ मगर खारा नहीं हूँ।।
मैं खुशबू हूँ सभी में घुल रहा हूँ
मगर ए यार आवारा नहीं हूँ।।
सभी मुझको बताते अपना लेकिन
किसी अपने को मैं प्यारा नहीं हूँ।।
हवा हूँ कल वहाँ था अब यहाँ हूँ
मगर सुन लो मैं बंजारा नहीं हूँ।।
किसी के काम भी मैं आ न पाऊँ
मैं इतना दोस्त नाकारा नहीं हूँ।।
है मेरा नाम लिखा रोशनी में
मैं जलता हूँ मगर तारा नहीं हूँ।।
पिघल जाऊंगा बन कर मोम जैसा
अभी इतना भी बेचारा नहीं हूँ।।
वो ताजमहल हूँ जो पत्थर का नहीं है
जिसमें है बहता रक्त लाल श्वेत नहीं है
चाहो तो कहीं से भी हमे तोड़ के देखो
दिल ही मिलेगा साथ में पाषाण नहीं है |
वो ताजमहल हूँ जो पत्थर का नहीं है
जिसमें है बहता रक्त लाल श्वेत नहीं है
चाहो तो कहीं से भी हमे तोड़ के देखो
दिल ही मिलेगा साथ में पाषाण नहीं है |
मुझे नहीं पता
वो ताजमहल हूँ जो पत्थर का नहीं है
जिसमें है बहता रक्त लाल श्वेत नहीं है
चाहो तो कहीं से भी हमे तोड़ के देखो
दिल ही मिलेगा साथ में पाषाण नहीं है |