कौन कहता है, गिरह को, खोल कर ख़ुश हो रहे हैं
हम तो, "तुम मेरे हो केवल" बोल कर ख़ुश हो रहे हैं।
कौन कहता है, गिरह को, खोल कर ख़ुश हो रहे हैं
वो ताजमहल हूँ जो पत्थर का नहीं है
जिसमें है बहता रक्त लाल श्वेत नहीं है
चाहो तो कहीं से भी हमे तोड़ के देखो
दिल ही मिलेगा साथ में पाषाण नहीं है |
पीड़ाओं को गाते गाते, नीर नयन तक आ पहुंचे हैं
वो ताजमहल हूँ जो पत्थर का नहीं है
जिसमें है बहता रक्त लाल श्वेत नहीं है
चाहो तो कहीं से भी हमे तोड़ के देखो
दिल ही मिलेगा साथ में पाषाण नहीं है |
वो ताजमहल हूँ जो पत्थर का नहीं है
जिसमें है बहता रक्त लाल श्वेत नहीं है
चाहो तो कहीं से भी हमे तोड़ के देखो
दिल ही मिलेगा साथ में पाषाण नहीं है |
वो ताजमहल हूँ जो पत्थर का नहीं है
जिसमें है बहता रक्त लाल श्वेत नहीं है
चाहो तो कहीं से भी हमे तोड़ के देखो
दिल ही मिलेगा साथ में पाषाण नहीं है |
नश्तरों की क्या ज़रूरत जिनकी तगड़ी धार धार
आँख ही कर देती है कपड़े बदन के तार तार।।
वो ताजमहल हूँ जो पत्थर का नहीं है
जिसमें है बहता रक्त लाल श्वेत नहीं है
चाहो तो कहीं से भी हमे तोड़ के देखो
दिल ही मिलेगा साथ में पाषाण नहीं है |