मम अंतर्नाद

मम अंतर्नाद
मेरा एकल ग़ज़ल संग्रह

शनिवार, 18 अक्टूबर 2025

ख़ुश हो रहे हैं

 कौन कहता है, गिरह को, खोल कर ख़ुश हो रहे हैं

हम तो, "तुम मेरे हो केवल" बोल कर ख़ुश हो रहे हैं।

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