साहित्य संजीवनी
Hindi poetry and Hindi sahitya Hindi Literature
मम अंतर्नाद
मेरा एकल ग़ज़ल संग्रह
शनिवार, 18 अक्टूबर 2025
वो लिखेंगे समझ जो आ जाये
वो लिखेंगे जो जग को भा जाए
हम बनेंगे जो जन्म देता है,
वो नहीं जो किसी को खा जाए।
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