मम अंतर्नाद

मम अंतर्नाद
मेरा एकल ग़ज़ल संग्रह

सोमवार, 2 सितंबर 2019

गीत :- वेदना के बीज






वेदना के बीज बोकर खाद डाली है अभी
प्रेम करके एकतरफा जीत पाली है अभी।

क्यों करें उनसे अपेक्षा जो उपेक्षा कर रहे
प्रेम को उपहार में पीड़ाएं देकर हंस रहे हैं
पा उपेक्षा ज़िन्दगी अपनी संभाली है अभी

प्रेम करके एकतरफा जीत पाली है अभी
वेदना के बीज बोकर खाद डाली है अभी।

सीख ये ली है, जगत से प्रेम करना है अगर
एक तरफा प्रेम ही हो सकता है केवल अमर
द्वंद से ये ज़िन्दगी अपनी निकाली है अभी

प्रेम करके एकतरफा जीत पाली है अभी
वेदना के बीज बोकर खाद डाली है अभी।

व्यक्तिगत स्वारथ से आगे सोचना होगा हमें
शूल हर एक उनके पथ का नोचना होगा हमें
उनकी खातिर हर कसम हमने उठा ली है अभी

प्रेम करके एकतरफा जीत पाली है अभी
वेदना के बीज बोकर खाद डाली है अभी।

जब तलक उस पर रहे निर्भर तभी तक कष्ट झेले
जब तलक थे स्वप्न अवगुंठन के तब तक थे अकेले
लो उसे शिव मान कर , बस भक्ति पाली है अभी

प्रेम करके एकतरफा जीत पाली है अभी
वेदना के बीज बोकर खाद डाली है अभी।







  1. स्वधा रवींद्र "उत्कर्षिता"


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